Sankirtan Schedule

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68 thoughts on “Sankirtan Schedule

          1. sorryyy i dnt hv this one even i m looking for this bhajan since long time
            its superb dhuni
            u can tell me any other one

        1. I would be very thankful if you could send me some of Vinod ji’s bhajans that are not available on youtube

          1. radhekrishna
            i dnt knw which bhajans r not available on youtube
            plz tell me few of bhajans then i will send u also ur mail id

  1. bahut ichha hai mann mein ki aapki mandali mein shamil ho jau aur krishan naam ki masti mein mast rhu ,, hare krishna

  2. mujhe tera pyar ab tak jo ho saka na haasil samjhi hu main yakeenan mujh mein hi kuch kami hai pyareeeee

  3. Sh. Vinod Ji Aap mujhe apne charno mai sathan dai dai prabhu apni team mai shamil kar lijiye mujhe paise nai apka sahara chaiye..life mai kuch na kuch toh karna hi hai bas yahi chahata hu ki aap apni team mai shamil kar lo apki team mai baith kar ek jagah prabhu ka nam leta rahuga my personal number hai prabhu 84377881121…

  4. jhalak dikha kar parda karna aadat hai mere banke bihari ki
    apne pyaron ko tarsana aadat hai mere banke bihari ki

  5. tum aate nhi mujhe bulate nhi kaho kaise mann dheer dhare
    nishthur se dil laga baithe ab tum bin kon ye peer hare

  6. O nirmohi mohe tazke na ja, Hansi mein aansu chipake na ja,
    Ek jaisi hai dasha apni, Yu mujhse tu daaman chudake na ja.

  7. Maine dekhi us maefarosh ki aakhein to sharaab ka peena chod diya
    Par sach to ye hai ki inki aakho ne sharab ka garoor tod diya.

  8. Kabhi Arsh par, kabhi farsh par..!
    Kabhi tere darr kabhi dar badar..!!
    Aye ghame aashiqui tera shukriya..!
    na jaane kaun kaun se daur se mai gujar gaya..!!

  9. nirala hai banke bihari nirala hai uske prem ka ehsaas
    vireh mein milan ki tadap hai aur milan mein vireh ki aas

  10. “Andaaz mehkane lagte hain, baaton me shararat hoti h,
    Aankho se pata chal jata hai, jis Dil me Mohabbat hoti hai”

  11. Sir,
    Please inform me exact place of sankirtan on 13th april 2014 in chandigarh i really wish to hear and see live sankirtan of Sh. vinod ji,, and also inform me where to contact for (tickets/passes) if required.

  12. मुझे आपने बुलाया…

    दया क्या ये कम है ओ घनश्याम प्यारे, जो चरणों में तेरे ठिकाना मिला है
    बड़े भाग्यशाली है वो तेरे बन्दे, जिन्हे आपसे दिल लगाना मिला है

    मुरारी मै रहमत के सदके तुम्हारी, जो चरणों में ये सर झुकाना मिला है
    वो क्या बाग़-ऐ-जन्नत की परवाह करेंगे, जिन्हे आप सा आशियाना मिला है

    इशारों से किस्मत बदल देने वाले, मुरादों से दामन को भर देने वाले
    तु है मेरा स्वामी मै तेरा पुजारी, तु है मेरा दाता मै तेरा भिखारी

    मुझे आपने बुलाया ये करम नहीं तो क्या है, मेरा मर्तबा बढाया ये करम नहीं तो क्या है

    हाँ प्यारे ! कहाँ तेरी चौखट और कहाँ मेरी जमीं (ललाट) !!!

    प्यारे तुम्हारे रसिकों की, प्रेमियों की संगत, तेरे दरबार की चौखट मेरे पुरुषार्थ का परिणाम नहीं हो सकती ! किसी साधना, उपासना या सत्कर्मों का परिणाम नहीं हो सकती ! यह तो तेरी महती अनुकम्पा है, वरना हम तो मायानगरी के, मोह की नगरी के, बैठे होते कही किसी होटल में, क्लब में, टीवी-विडिओ ना जाने और कहाँ कहाँ होते – लेकिन तेरा ही बुलावा आया है !!!

    कहाँ तेरी चौखट कहाँ मेरी जमीं, तेरे फ़ैज़ों करम की तो हद ही नहीं !!!

    मै ग़मों की धूप में जब तेरा नाम ले के निकला, तेरी रहमतों का साया ये करम नहीं तो क्या है

    ग़मों की धूप प्यारे – ये जीवन की राहें थी तो बड़ी कठिन, ये struggle tension negative thinking क्योंकि असफलताओं
    के दौर जो चले. मै negative में ही जा रहा था लेकिन वाह रे तेरी करुणा नजर !!! मै फिसला तो जरूर लेकिन तुमने पूर्णरूपेण गिरने नहीं दिया ! हर बार negative में ही गया लेकिन कहीं ना कहीं से तेरी करुणा ऐसी हो जाती है कि positive rays मिलती और मै फिर से सम्हल जाता

    मै ग़मों की धूप में जब तेरा नाम ले के निकला, तेरी रहमतों का साया ये करम नहीं तो क्या है

    आप जब से हमसफ़र हो गये, रस्ते बड़े मुक्तसर हो गये (मुक्तसर यानि आसान)
    जीवन की राहें थी तो बड़ी कठिन लेकिन वही बात
    आप जब से हमसफ़र हो गये, रस्ते बड़े मुक्तसर हो गये और एक तेरा दर क्या छूटा, हम दरबदर हो गये

    मै ग़मों की धूप में जब तेरा नाम ले के निकला, तेरी रहमतों का साया ये करम नहीं तो क्या है

    मेरी लब्जीशों को पैहम मिले आपके सहारे, मै गिरा तो खुद उठाया ये करम नहीं तो क्या है

    लब्जीशों बोलते है ग़लतियों को और पैहम यानि लगातार Continuous प्यारे मै ग़लतियों पे ग़लतियों करता गया लेकिन वाह रे तेरी करुणा नज़र!!! किसी भी जीव के दोष देखती ही नहीं !!!

    मुझे वक्त-ऐ-जिक्र करके मेरी रूह में उतर के, मेरे दिल को दिल बनाया ये करम नहीं तो क्या है

    वक्त-ऐ-जिक्र करके – प्यारे तुमने ऐसे अनुभव करवा दिये, एक दृष्टा भाव साक्षी भाव दे दिया – कौन सा ?
    कि करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है और जब से इस भाव की पुष्टि होने लगी तो क्या हुआ ?

    ये साधनाओं की आवश्यकताएँ नहीं रही – किस प्रकार ?
    मेरी रूह में उतर के – मेरे अपने ही अंदर तुम आत्मा के रूप से, साक्षी भाव से सब देख रहे हो
    तुम व्याप्त तो थे लेकिन अंदर से व्यक्त होने लगे. परिणाम क्या हुआ ?
    जो तुम्हे बाहर पाने की दौड़ थी, तुमने सब समाप्त कर दी – तो क्या हुआ ?

    आशिक़ कहता है, सूफी कह देता है कि –

    मेरे दिल में अमी के कुण्ड भरे, जब चाहूँ मै पिऊ भर-भर के
    बिन पिए नशे में चूर रहूँ, मयखानों की परवाह कौन करे

    मेरे अपने ही दिल में खुदाई है, काबा है ऊर अंतर में
    जब दिल में खयाले सनम नबी, फिर औरों की पूजा कौन करे

    ये रस्मी पूजा कौन करे – तुमने सुमिरन में प्रवेश करा दिया प्यारे, तो क्या हुआ ?
    कि ना मै जाऊं द्धारका, ना जाऊं मै काशी
    जहाँ बिछा दूँ अपना आसन, वहीं मेरा अविनाशी

    ये कैसे हुआ ? मुझे वक्त-ऐ-जिक्र करके

    मेरे दिल को दिल बनाया – अब ये मांस का लोथड़ा नहीं रहा जिसका काम केवल blood circulation या purification या धड़कना हो ! प्यारे इसके अंदर अब तुम्हारे लिए भावनाएं मचलने लगी और इन भावनाओं ने क्या किया ? तुम्हारा अहसास भी करवाया, तुम्हारा अनुभव भी करवाया…

    उनकी कृपा का अनुभव हमें क्यों नहीं होता ?

    क्योंकि हम अपने ही अनुभव का अनादर करते है ! कोई जीव ऐसा है ही नहीं जिसको कभी ना कभी उसने अपना अनुभव न कराया हो. हमारी मजबूरियाँ क्या है, कमजोरियाँ ही कहिये – हम दूसरों के सुनने पर अधिक जाते है और जो उसने करुणा हमारे ऊपर की है, उन क्षणों को हम भूल जाते है !

    उन्ही क्षणों को यदि बार-बार याद किया जाये तो प्रभु के ऊपर विश्वास दृढ़ होता जाता है और विश्वास जितना दृढ़ होता है हमारा बाहर भटकना उतना कम होता जाता है – क्यों ? जीव कब भटकता है ? जब उसका विश्वास भटकता है, जब उसका विश्वास कमजोर होता है तो कभी इस देवता में, कभी उस धरम में, कभी यहाँ कभी वहां – क्योंकि विश्वास एक जगह कायम नहीं हो पाता है

    और जब उसका अनुभव हम अपने self-realization में देखते है तो पता चलता है कुछ करने की जरुरत ही नहीं – सब कुछ अपने आप हो रहा है और यही अनुभव क्या कहता है – मेरे दिल को दिल बनाया, ये करम नहीं तो क्या है

    मुझे आपने बुलाया ये करम नहीं तो क्या है, मेरा मर्तबा बढाया ये करम नहीं तो क्या है…

  13. श्री कृष्ण परम स्वतंत्र है

    खेलना तो जैसे उनका स्वभाव ही ठहरा !

    और खेल भी एक से बढ़कर एक, बड़े विचित्र-विचित्र, नाना प्रकार की
    विविधताओं-विलक्षणताओं से युक्त सम्पूर्ण जगत ही उनका क्रीड़ास्थल है – इस
    बर्हापीड़म नटवरवपु लीलाविहारी श्यामसुंदर का !

    उनके जैसा चतुर निष्णात खिलाड़ी तो कोई है ही नहीं – खेल वही, खिलाड़ी भी वही और
    खिलाने वाले भी वे ही ठहरें ! वाह रे – मान गए इस खिलाड़ियों के भी खिलाडी को –
    क्या कला है !

    उन्हें अकेलापन बिलकुल भी नहीं सुहाता
    सृष्टि-रचना के आरम्भ में भी एक से अनेक होने की कामना की – “एकोह्म बहुस्याम” – बस इस पूरे प्रपंच में जैसे वे ही
    समा गए हो ! वासुदेव सर्वम्

    कण-कण में व्याप्त तो है, विद्यमान है लेकिन व्यक्त नहीं होते ! है ना परम स्वतंत्र तत्व – उनकी वे जाने खुदा !
    घट-घट वासी है लेकिन योगमाया समावृत्त होने से दिखाई नहीं देते – परदानसीं जो ठहरे ! डरते है नज़र लगने से मेरे परवरदिगार !

    वे चाहते है कि हम सब जीव उनके साथ ही खेले, न की दिये हुए खिलौनों से उलझ जाए – कैसे खेले ?

    तो भगवान कहते है – मुझे अपना बना कर, अपना मान कर क्योंकि वस्तुतः सब का सब कुछ तो केवल मैं ही हूँ सबका आदि-मध्य-अंत मै ही हूँ – सब मुझसे से उत्पन्न होता है, मुझ में ही स्थित रहता है और फिर मुझ में ही विलीन हो जाता है

    और थोड़ा सूक्ष्म में जाकर कहते है – शरीर और शरीर के अंदर रहने वाला “शरीरी” दोनों के विभाग बिलकुल अलग-अलग है, यह बात जान लो कि
    शरीर की साम्यता संसार के साथ है क्योंकि दोनों ही प्रकृति के अंश है परन्तु “शरीरी” तो मेरा ही सनातन अंश है ! वह न दिखने वाला अन्तर्यामी
    मै ही तो हूँ

    लेकिन मेरे साथ खेलने की पध्दति थोड़ी अटपटी है, सो कैसे ?

    तो बताते है – अर्जुन ! तुम निमित्त बन जाओ, कर्तापन भूल जाओ क्योंकि सब करने-कराने वाला तो मै ही हूँ
    बस तुम्हे करना इतना ही है – अपने को कठपुतली समझ कर, अपने जीवन को मुझ सूत्रधार के हाथों में सौप दो – बाकी काम तो मेरा है

    जैसे स्टेज पर नाटक के दौरान पात्र अपने-अपने स्वांग के अनुसार ठीक-ठीक अभिनय करता है अपेक्षानुसार, यह भीतर से पूर्णतया ध्यान रखते हुए कि यहाँ की कोई भी वस्तु मेरी नहीं है, नाटक के अन्य पात्रों से मेरा कोई भी सम्बन्ध नहीं है, खेल से होने वाली आमदनी में भी मेरा कोई हक़ नहीं बनता और मेरा वास्तविक रिश्ता तो परदे के पीछे छिपे हुए सूत्रधार से है

    दूसरे शब्दों में कहे तो नाटक का सीधा-सीधा सा मतलब है – न अटक – हमें कही भी अटकना नहीं है वरना नाटक ही बिगड़ जायेगा, व्यवहार सबसे अच्छा करना है, सेवा सभी की करनी है लेकिन ध्यान रखते हुए कि कौन वास्तव में मेरा है

    आगे और कहते है कि – अपने पापों की चिंता ना करना, वो तो हम धो डालेंगे – बस तुम आ तो जाओ मेरे पास
    या तो मुझे अपना बना लो या मेरे बन जाओ – दोनों ही मुझे मान्य है क्योंकि तुम मेरे बड़े प्यारे हो…

  14. I do not want to miss this golden opportunity & want to attend the program on 10th May but could not find the location. Plz update contact number of program organizers.

  15. लोग कहते हैं के मुहब्बत एक बार होती है

    मैं जब जब उसे देखूं मुझे हर बार होती है.

    !!…”जय जय श्री राधे श्याम”…!!

  16. Please where can I find ( I mean in which Bhajan Sandhya or Bhajan Mala) the words the ” Sabak Ruthne ka hame to Batate, Hame bhi jara Aajmake jate, Jara aur rukete to hoti enayat saja payaar ki tum sunakar to jate

    1. Bhajan – Mathura Mein Jaake Manmohan Tum Murali Bajana Bhool Gaye
      VCD Title – Shyam Tum Bhool Gaye (Available on T-Series)

  17. Sh. Vinod Ji Aap mujhe apne charno mai sathan dai dai prabhu apni team mai shamil kar lijiye mujhe paise nai apka sahara chaiye..life mai kuch na kuch toh karna hi hai bas yahi chahata hu ki aap apni team mai shamil kar lo apki team mai baith kar ek jagah prabhu ka nam leta rahuga my personal number hai prabhu 84377881121…

  18. Please someone upload video from 07/20/2014 at Durga Mandir, Princeton, Nj, USA.One family from Plainsboro, NJ gave me
    Shri Vinodji’s CD .I like thank you that family from bottom of my hrart.
    Jai Shri Krishna.
    Kirti

  19. Mere Jeevan ke gulshan ki bhaharo par fiza chayi…
    yeh mausam bhi badal jaye.. agr tum milney aa jao…

    Tamana fir machal jaye agar tum milne aa jao…
    meri zindgi sawar jaye agr tum milney aa jao….

  20. आप ने अपना बनाया, मेहेरबानी आपकी
    वरना हम तो इस लायक न थे, ये कदरदानी आपकी ||

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